मेरा हिस्सा

हम केवल हम नहीं होते। कई और हम भी होते हैं हमारे हम में। और हम भी हिस्सा होते हैं कई हमों के। इतिहास और भविष्य किसी एक का नहीं होता। वह कुछ एकों का भी नहीं होता। हो ही नहीं सकता। क्योंकि वह सब का होता है।

किसी इतिहास, संस्कृति या विरासत को महज अपना बता देना नादानी ही नहीं बेईमानी भी है। मानव विकास की हर सीढ़ी किसी की कल्पना, किसी के पैसे, किसी की मेहनत, और किसी का खून से रंगी बनी होती है। इसलिए जब हम जाग जाते हैं तो अक्सर अपना हिस्सा माँगते हैं। जान बूझ कर अपना हिस्सा ना माँगना नादानी ही नहीं बेईमानी भी है।

मेरा हिस्सा

बीते रस्ते,
मुड़ जिनमें
तुम झाँक रहे हो;

पदचिन्हों को,
आज जिन्हें तुम
नाप रहे हो;

याद तुम्हें क्या?
आधा हिस्सा
मेरा भी है!

शब्द निराले,
आज जिन्हें तुम
बाँच रहे हो;

कर्म नियोजित,
आज जिन्हें तुम
आँक रहे हो;

याद तुम्हें क्या?
आधा हिस्सा
मेरा भी है!

आज के
पीछे वाले
कल में,

आज से
आगे वाले
कल में,

याद तुम्हें क्या?
आधा हिस्सा
मेरा भी है!

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1 Response

  1. Himmat Singh Rautela says:

    Bhuat Sandar…

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