आईआईटी, आईआईएम और जेएनयू
भीड़ में इन्सान को पहचाना कठिन होता है। इंसानों को उनके कर्मों से पहचाने के लिए काफी वक्त चाहिए जो अमूमन लोगों के पास नहीं होता। इसलिए जमाना तमगों का है। हम क्या हैं वह ‘हम’ नहीं बल्कि हमारे ठप्पे तय करते हैं।
भीड़ में इन्सान को पहचाना कठिन होता है। इंसानों को उनके कर्मों से पहचाने के लिए काफी वक्त चाहिए जो अमूमन लोगों के पास नहीं होता। इसलिए जमाना तमगों का है। हम क्या हैं वह ‘हम’ नहीं बल्कि हमारे ठप्पे तय करते हैं।
दो छोटे खेतों, एक भैंस, दो गाय और छह बकरियों के कारण गाँव शहर न जा सका। और गाँव तथा पास के पहाड़ी शहर में नदारत स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते शहर गाँव नहीं आ पाया। इसलिए तय हुआ की शिवराज, अपनी पत्नी सावित्री, और 20 दिन के बच्चे के साथ गाँव आएगा ताकि 21वें दिन नामकरण हो सके।