वर्तमान ये भूल ना जाना
लोकतंत्र लोक से चलता है। पर लोक कैसे चलता है? प्रचार से? अधिप्रचार से? या समझ बूझ से – यथार्थ की निष्पक्ष समीक्षा करते हुए उज्वल और ईमानदार भविष्य के व्यावहारिक सपने बुनता हुआ!
लोकतंत्र लोक से चलता है। पर लोक कैसे चलता है? प्रचार से? अधिप्रचार से? या समझ बूझ से – यथार्थ की निष्पक्ष समीक्षा करते हुए उज्वल और ईमानदार भविष्य के व्यावहारिक सपने बुनता हुआ!
जब चारों दिशाओं में हाहाकार मचा हो, हर तरफ से दुख की ही खबरें आ रहीं हो तब व्याकुल मन उस अंधकार में रोशनी तलाशने निकलता है। क्योंकि रोशनी के बिना अंधकार संभव ही नहीं। एक ऐसी ही रोशनी की लघु कथा।