सौंदर्यबोध

सौंदर्यबोध

सुंदर पहाड़ी रास्तों पर चलते हुए अक्सर तन थक जाता है पर मन नहीं। इसलिए जैसे ही मुझे सुन्दर बुरांश के फूल दिखे मैं अपनी सारी थकान भूल सा गया और अपने बालकपन में लगभग फुदकते हुए जोर से बोल बैठा, “अहा, कितना सुन्दर फूल है! “